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मुरार के बारे में

प्राचीन काल में मुरार ब्रिटिश सैन्य छावनी था. १८५७ के विद्रोह के दौरान, मुरार को मध्य भारत के उभरते हुए स्थान के रूप में जाना जाने लगा . सन १८८६ में सिंधिया द्वारा ग्वालियर का किला बहाल किया गया था. जिस कारण सैन्य टुकडिया झाँसी में वापस चली गयी. तत्पश्चात सिंधिया ने ग्वालियर पर शासन किया. स्वंत्रता के पश्चात् ग्वालियर, इंदौर, और मालवा तथा अन्य छोटे राज्यों से मिलकर मध्य भारत का निर्माण हुआ. सन १९५६ में मध्य भारत, विन्ध्य , भोपाल तथा महा कौशल को मिलाकर मध्य प्रदेश का निर्माण हुआ. ग्वालियर मूलतः तीन विभिन्न अंचलों से मिलकर बना है जो कि पुराना ग्वालियर क़स्बा, लश्कर, और मुरार हैं. मुरार पुराने ग्वालियर कसबे कि पश्चिमी दिशा में ५ किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है. इसलिए मुरार ग्वालियर के कस्बों में से एक है. मुरार को ग्वालियर के हरित क्षेत्रों में भी गिना जाता है. मुरार में काफी खेत हैं जो कि १४ गाँव में स्थित हैं. भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर इस क्षेत्र में बहुतायत से पाया जाता है इसलिए इस क्षेत्र का नाम मुरार पड़ा है.